जीआरएन के ऑडियो विज़ुअल संसाधन कैसे उपयोग करें - भाग 2: गहरे जाना

जीआरएन के ऑडियो विज़ुअल संसाधन कैसे उपयोग करें - भाग 2: गहरे जाना

गहराई में जाना

परिचय

जीआरएन की ऑडियो-विज़ुअल प्रस्तुतियों में: "सुसमाचार", "देखो, सुनो और; जीओ", तथा "जीवित मसीह" शामिल हैं. इन प्रस्तुतियों के सभी लेख बाइबल से ली गई कहानियाँ हैं. ये बाइबल के अनुवाद नहीं हैं वरन साधारण और उचित रीति से बाइबल के सन्देश देने का माध्यम हैं. इनके मूल लेख में लगभग कोई व्याख्या नहीं दी गई है.

ऐसा क्यों? क्योंकि हम चाहते हैं कि परमेश्वर का वचन सुनने वालों के हृदय से सीधे बात करे. हम चाहते हैं कि परमेश्वर स्वयं ही अपना सन्देश सुनने वालों को दे. हम यह धारणा रखकर कि हमें पता है कि किस समय परमेश्वर कौन सी बाइबल कहानी से क्या सन्देश देना चाहता है, परमेश्वर के मार्ग में बाधा बनना या श्रोताओं के निर्णय को प्रभावित नहीं करना चाहते. बाइबल की कहानी का अर्थ अनेक बातों द्वारा प्रभावित हो सकता है जैसे कि धार्मिक पृष्ठभूमि, संसार के प्रति दृष्टिकोण, संसकृति, वर्तमान परिस्थितियाँ इत्यादि. इसका यह मतलब नहीं है कि बाइबल बिलकुल खरा और अकाट्य सत्य नहीं बतलाती और ना ही यह कि बाइबल की प्रत्येक व्याख्या हमेशा एक सी ही होती है. लेकिन, परमेश्वर अपने सन्देश के भिन्न सत्यों को भिन्न लोगों तक उसी एक कहानी से अलग अलग रीति से बता सकता है!

प्राथमिक उद्देश्य

इस 'सहायक दस्तावेज़' का प्रयोग करते समय, बात का ध्यान रखना आवश्यक है कि हमारा उद्देश्य परमेश्वर के सन्देश सुनने में लोगों की सहायता करना है ना कि उन्हें यह बताना कि उस सन्देश से वो क्या निष्कर्ष लें. हम चाहते हैं कि हमारी सहायता से लोग कहानी को खोलें, उसमें रुचि लें और परमेश्वर के सन्देश को सुनें.

एक बात और, अकसर मौखिक सन्देशवाहक किसी कहानी से महत्वपूर्ण शिक्षाएं अधिक सरलता से समझाने पाते हैं बजाए उनके जिनकी पाश्चात्य शिक्षा प्रणाली की पृष्ठभूमि है.

सीखने और सन्देश संचार की शैलियाँ

एक ही संसकृति में भिन्न लोग भिन्न रिति से सीखते हैं. कुछ पुस्तक पढ़ने से ही सीख लेते हैं तो कुछ को कर के दिखाना होता है. कुछ सुनने के द्वारा ही स्मरण कर लेते हैं. अन्य यदि वे उसे लिख ना लें तो शीघ्र ही भूल जाते हैं. इसी प्रकार सीखने और सन्देश संचार के तरीके भी भिन्न संसकृतियों में भिन्न होते हैं. कुछ पारंपरिक संसकृतियों में एक 'युवा' शिक्षक की विश्वसनियता कम ही होती है, जो पाश्चात्य संसकृतियों में नहीं है. किसी अन्य संसकृति में बुज़ुर्ग महिलाएं परंपराएं एक से दूसरी पीढ़ी को पहुँचाती हैं. किसी अन्य संसकृति में निर्धारित कथा वाचक यह कार्य करते हैं.

बहुत से प्रश्न उठ सकते हैं: "क्या पुरुष महिलाओं को और महिलाएं पुरुषों को सिखा सकती हैं?", क्या प्रत्येक व्यक्ति अपना विचार व्यक्त कर सकता है?", "प्रभाव और अधिकार रखने वाले लोग कौन हैं?", "भिन्न परिस्थितियों में उपयुक्त संचार माध्याम कौन सा है - गीत, नाटक, चित्र?", "क्या प्रश्न किए जा सकते हैं या ऐसा करना उचित नहीं होगा?" "क्या संसकृति की माँग है कि आप सदा ही सहमति व्यक्त करें, चाहे आप सहमत ना भी हों?", इत्यादि.

अच्छी शिक्षा प्रणाली उन लोगों की शिक्षा परंपराएं और संचार रीतियाँ समझने का प्रयास करेगी जिनके बीच वह प्रयोग होनी है. कोई भी विधि ऐसी नहीं है जो सब पर एक समान लागू हो सके लेकिन कुछ सिद्धांत हैं जो बहुत सी परिस्थितियों में लागू किए जा सकते हैं.

सामग्री के प्रयोग के लिए दिशा निर्देश

यदि हमारा प्राथमिक उद्देश्य है कि लोग परमेश्वर के सन्देश को सुनें, समझें और उस पर प्रतिक्रीया दें तो इसे सरल और प्रभावी कैसे बनाया जा सकता है?

1. प्रार्थना करें!

यह एक आत्मिक कार्य है और यदि लोगों को पापों से बचना, विश्वास और परमेश्वर के ज्ञान में बढ़ना है तो पवित्र आत्मा का कार्य होना अनिवार्य है. इसके लिए ना तो कोई विकल्प है और ना कोई अन्य छोटा रास्ता. प्रार्थना अनिवार्य है.

2. आरंभ से आरंभ करें और मन्द गति से आगे बढ़ें

जहाँ तक संभव हो उत्पत्ति से आरंभ करें, जिन लोगों से आप बात कर रहे हैं उनकी जानी पहिचानी बातों के द्वारा उनसे संपर्क बनाएं. बहुत जल्दी में बहुत कुछ सिखाने का प्रयास ना करें. यदि आप सुसमाचार या देखो सुनो और जीओ सामग्री का प्रयोग कर रहे हैं, तो पहले से अपने आप को तैयार करें जिससे जब सन्देश में विराम आए तो आप रुक कर चर्चा कर सकें. पूरी कहानी को एक साथ सुनना और छोटे छोटे भागों में बाँट कर सुनना दोनों ही महत्वपूर्ण विधियाँ हैं इसलिए सही विधि अपनाने के लिए अपने श्रोताओं को आपका मार्गदर्शक बनने दीजिए. उनसे पूछिए, "क्या आप और आज सुनना चाहेंगे या फिर कल?"

3. लोगों की सहायता करें कि वे कहानी को समझ सकें

कहानी को पुनः बताएं, उसे फिर से चलाएं, उसे नाटक द्वारा समझाएं, उनसे कहें कि वे उस कहानी को वापस आपको सुनाएं या उसे समझाएं. आप उनसे कहानी को नाट्क करने के द्वारा बताने को भी कह सकते हैं.

4. उनके ज्ञान के स्तर को बढ़ाते जाएं

पुराने नियम की ऐसी कहानियाँ लें जो परमेश्वर के चरित्र और उसकी योजना को बताती हैं. हर बार बहुत अधिक नई बातें ना बताएं.

5. उचित प्रश्नों का प्रयोग करें

यदि प्रश्न पूछना उपयुक्त है तो निम्नलिखित प्रश्नों का प्रयोग कीजिए. ये प्रश्न किसी विशेष दिशा में नहीं ले जाते और बहुत सी कहानियों के साथ प्रयोग करे जा सकते हैं. इस का यह भी तात्पर्य है कि आपको भिन्न कहानियों के लिए भिन्न प्रश्न समरण रखने कि आवश्यकता नहीं होगी.

  1. आपको कहानी में क्या पसन्द आया?
  2. आपके विचार से कुछ लोगों को कहानी में क्या पसन्द नहीं आएगा?
  3. इस कहानी के कौन से चरित्र (यदि कोई है तो) के समान आप अपने आप को देखते हैं?
  4. इस कहानी से आप परमेश्वर के बारे में क्या सीखते हैं?
  5. यह कहानी हमें लोगों के बारे में क्या सिखाती है?
  6. आप इस कहानी के प्रति क्या प्रतिक्रीया देना चाहेंगे?
  7. क्या इस कहानी से संबंधित कोई प्रशन है जो आप पूछना चाहेंगे?

उपरोक्त प्रश्नों के उत्तर देने में सहायता करने के लिए आप कुछ सहायक प्रश्न भी पूछ सकते हैं जैसे (यदि आपको प्रश्नों के कुछ विशेष उत्तर नहीं मिले तो) उपरोक्त प्रश्न 5 के लिए आप पूछ सकते हैं जब प्रभु यीशु ने सूखे हुए हाथ वाले व्यक्ति को चंगा किया तो उपस्थित भीड़ की क्या प्रतिक्रीया थी? आपके विचार में भीड़ की ऐसी प्रतिक्रीया क्यों थी?

आप उन से यह भी पूछ सकते हैं कि उन की संसकृति में भी कोई ऐसी ही कहानी है कि नहीं. यदि है तो उन्हें कहें कि वे उसे बताएं. फिर उनसे पूछें कि उनकी कहानी आपकी बताई कहानी से कैसे भिन्न है?

ऐसे ही अनेक प्रश्न हो सकते हैं जो भिन्न परिस्थितियों में, भिन्न कहानियों के संबंध में या उस समय कहानी में क्या चल रहा है से उठ सकते हैं. इसके कुछ उदाहरण यह हैं:

  1. यदि लोग प्रभु यीशु की शिक्षाओं का पालन करने लगें तो आपके गाँव/परिवार/व्यक्तिगत जीवन में क्या फर्क आ जाएगा?
  2. इस कहानी में दी गई परिस्थिति आपके गाँव या परिवार की कहानी से कैसे भिन्न अथवा समान है?
  3. आपके विचार से इस कहानी के पात्र को क्या करना चाहिए?
  4. आप क्या सोचते हैं परमेश्वर/प्रभु यीशु ने यह क्यों कहा/किया?

6. रचनात्मक बनें और अपने पाठ बाँटें

यह केवल एक आरंभिक निर्देशिका है. यदि आप का कोई ऐसा अनुभव है जो इस प्रयास में प्रभावी और सहायक रहा है तो कृपया उसे हमारे साथ बाँटें. यदि आप ने कुछ गलतियाँ करी और आपको लगता है कि दूसरे भी उन से शिक्षा ले सकते हैं तो उन्हें भी हमारे साथ बाँटें. हमसे यहाँ से संपर्क करें और अपनी राय प्रतिक्रीया द्वारा दें.

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